कोरोना : महामारी, परिचय , लक्षण, उपचार/बचाव, वैक्सीन/दवा

वैश्विक महामारी कोरोना

चीन के वुहान शहर से शुरू हुए कोरोना वायरस का प्रकोप आज पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले चुका है. आज विश्व की महाशक्तियां इसके आगे लाचार हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इसे  कोविड-19 नाम दिया गया है. उल्लेखनीय है कि  कोरोना वायरस मानव के बाल की तुलना में 900 गुना छोटा है. आकार में इस छोटे वायरस से पूरी दुनिया भयभीत है. स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में अग्रणी राष्ट्र भी आज इस विपदा से निपटने में स्वयं को असमर्थ पा रहे हैं; सयुंक्त राज्य अमेरिका , इटली, स्पेन, चीन, इरान , बेल्जियम,  फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, ब्राजील, भारत इत्यादि देशों में हुई मौतें इसका उदाहरण हैं. इसकी गंभीरता व व्यापकता के मद्देनजर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे महामारी घोषित कर दिया है. इस संदर्भ में भारत सरकार द्वारा पूरे भारत में कर्फ्यू लगा दिया गया, कई लॉकडाउन किये पर यह भयंकर वायरस सब पर भारी पड़ रहा है. न अभी तक कोई कारगर दवाई बन पाई है तथा न ही कोई वैक्सीन ही बन पाई है. 

क्या है कोरोना ?

कोरोना कई प्रकार के  विषाणुओं  (वायरस) का एक समूह है जो स्तनधारियों और पक्षियों में रोग उत्पन्न करता है। यह RNA वायरस होते हैं. वाइरस सी-फूड से जुड़े इस वायरस की शुरुआत चीन के हुवेई प्रांत के वुहान शहर के एक सी-फूड बाजार से हुई है। यह  वायरस इंसानों के साथ-साथ पशुओं को भी अपना शिकार बना सकता है।

लक्षण 

कोरोना के शुरुआती लक्षण फ्लू जैसे होते हैं. जैसे कि हम जानते हैं, फ्लू के मुख्‍य लक्षण हैं – जुकाम, नाक बहना, खांसी, सिरदर्द, आंखों का लाल होना और आंखों से पानी आना.  लेकिन आम फ्लू कुछ दिनों में अपने आप या हलके उपचार जैसे गरम पानी से गरारे करने, आराम करने इत्यादि से ठीक हो जाता है,

परन्तु कोरोना का संक्रमण बढ़ता ही जाता है. इसमें धीरे-धीरे सूखी खांसी, सांस लेने में तकलीफ और बुखार आना शुरू हो जाता है. बुखार के साथ अगर सांस लेने में तकलीफ और सूखी खांसी है तो यह चिंता का विषय बन जाता है. कोरोना के कुछ और भी लक्षण हैं जो फ्लू से बिल्‍कुल अलग हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर 88 प्रतिशत को बुखार, 68 प्रतिशत को खांसी और कफ, 38 प्रतिशत को थकान, 18 प्रतिशत को सांस लेने में दिक्कत, 14 प्रतिशत को शरीर और सिर में दर्द, 11 प्रतिशत को ठंड और 4 प्रतिशत में डायरिया के लक्षण पाए जाते हैं.

कोरोना वायरस का मुख्य लक्षण तेज बुखार है. अगर बुखार 101 डिग्री फ़ारेनहाइट या इससे ऊपर पहुंचता है तो यह चिंता का विषय हो सकता है. यह बुखार धीरे-धीरे निमोनिया का रूप ले सकता है और यही  निमोनिया किडनी और फेफड़ों से जुड़ी कई तरह की समस्याओं को बढ़ा सकता है। कोरोना वायरस से संक्रमित होने के 5 दिनों के भीतर व्यक्ति को सांस लेने में भारी समस्या हो सकती है. ऐसे फेफड़ों में फैले कफ के कारण होता है .

इसके अतिरिक्त कई मामलों में   कोरोना पीड़ित व्यक्ति की सूंघने और स्वाद के क्षमता में भी कमी आ जाती हैं या आ सकती हैं.
कोरोना वायरस से मृत्युदर का आंकड़ा

1. 9 साल तक – 0 प्रतिशत

2. 10-39 वर्ष तक 0.2 प्रतिशत

3. 40-49 वर्ष तक 0.4 प्रतिशत

4. 50-59 वर्ष तक  1.3 प्रतिशत

5. 60-69 वर्ष तक  3.6 प्रतिशत

6. 60-69 वर्ष तक 3.6 प्रतिशत

7. 70-79 वर्ष तक 8 प्रतिशत

8. 80 से ज्यादा वर्ष  14.8 प्रतिशत


उपचार/बचाव

इंग्लिश में एक कहावत है- Prevention is better than cure अर्थात इलाज से परहेज अच्छा है. यह कहावत कोरोना पर भी लागू होती है. जितना हो सके हमें संपर्क से बचना है.  लोगों से मिलना- जुलना और भीड़ से अलग रहकर ही हम इस खतरनाक बीमारी से बच सकते हैं.

1. जितना हो सके सी-फूड से दूर रहें.

2. साफ-सफाई कोरोना वायरस से बचने का उत्तम उपाय है. इसके अलावा ,  जंगली जानवरों के संपर्क में आने से भी बचना चाहिए.

3. सामाजिक दूरी बनाये रखें. जितना अलग-थलग रहेंगे उतने ही बचे रहेंगे, अभिवादन के लिए हाथ कभी ना मिलाएं. नमस्ते करें. किसी से बात करते समय छह फीट की दूरी बनाए रखें.

4. हर एक घंटे में तथा कहीं भी बाहर से आने या कुछ भी खाने से पहले अपने हाथ अच्छी तरह साफ करें। हाथ न सिर्फ पानी से बल्कि साबुन या हैंडवॉश से धोएं. हाथों को कम से कम 20 सेकंड तक धोएं .

5.   हमेशा हैंड सेनिटाइजर अपने साथ  रखें तथा उसके समुचित उपयोग करें.

6) मास्क पहनें, मास्क को धोते भी रहना चाहिए.  अगर मास्क नहीं है , या उपलब्ध नहीं हो पा रहा तो आप रुमाल भी उपयोग में ला सकते हैं. 

7. अपने मुंह और चेहरे पर हाथ न लगाएं.

7. पब्लिक प्लेस में जाने पर अपनी नाक और मुंह को कवर करके रखें.

वैक्सीन  और दवा

पूरा विश्व आज इस जानलेवा बीमारी का इलाज ढूढने में लगा  है. दुनियाभर के वैज्ञानिक, डॉक्टर और शोधकर्ता  कोरोना की वैक्सीन और दवा को लेकर रात-दिन मेहनत कर रहे हैं. हालांकि अबतक इसका कोई ठोस इलाज सामने नहीं आया है पर कई शोधों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। अमेरिका में जहां वैक्सीन का मानव शरीर पर परीक्षण किया जा चुका है. इसी प्रकार , वहीं दूसरी ओर भारतीय कंपनी सिप्ला और जापानी कंपनी टाकेडा फॉर्मा ने इसकी दवा बनाने के संबंध में अपना दावा किया है। लेकिन अमूमन किसी भी बिमारी की दवा बनाने की एक प्रक्रिया होती है, उसके टेस्टिंग और क्लिनिकल ट्रायल होते हैं. पहले जानवरों पर तथा फिर मानव पर उसका परिक्षण होता है, फिर विभिन्न मेडिकल बोर्ड उन्हें अप्रूव करते हैं तथा फिर उसे मान्यता प्रदान की जाती है.

हाँलाकि  खबरें आ रही हैं कि वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस से लड़ने वाली 69  दवाओं की पहचान कर ली है। मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा क्लोरोक्वीन के भी ठीक परिणाम सामने आ रहे हैं। लेकिन कोई भी दवा बिना डॉक्टर की सलाह लेना अपनी जान को खतरे में डालना है.

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