स्वस्थ रहने के तरीके

प्रत्येक मनुष्य के लिए उसकी सबसे पहली प्राथमिकता उसका स्वास्थ्य होना चाहिए। प्राचीन काल से ही एक कहावत ही प्रसिद्ध है।पहला सुख निरोगी काया। कोई भी मनुष्य अपने जीवन का भरपूर आनंद तभी ले सकता है, जब वह शारीरिक रूप से स्वस्थ हो। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य के लिए शारीरिक स्वास्थ्य अनिवार्य है। आइए, स्वस्थ रहने के कुछ तरीकें जानें।

1-         स्वयं की व अपने आस-पास सफाई रखें स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छता को अपनायें। इस भीड़-भाड़ भरी दुनिया में और दिनभर ऑफिस में काम करने से शरीर से पसीना निकलता है जिसके कारण हमारे कपड़ों से दुर्गंध आने लगती है और हमारे कपड़े भी मैले हो जाते हैं। इन सबसे शरीर में कीटाणु पनप जाते हैं और कई बीमारियाँ लग जाती है। इस सबसे बचने के लिए स्वयं की व अपने आस-पास का माहौल साफ रखें।

2-         नियमित व्यायाम करें

शरीर को स्वस्थ व तंदरुस्त रखने का एक साधन व्यायाम भी है। नियमित व्यायाम करने से शरीर में रक्त का संचार ठीक रहता है और मांसपेशियों में बल आ जाता है। व्यायाम रक्त चाप को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसके अतिरिक्त नियमित व्यायाम करने से हाईब्लडप्रेशर लगभग 75ः तक कम हो जाता है। 

3-         स्वयं को तनावमुक्त रखें

अकसर देखा जाता है कि कुछ लोग तनाव, अस्वीकार्यता, उदासी तथा कामयाबी की परिस्थिति में भोजन का सेवन अधिक मात्र में करने लगते हैं, जिसके कारण कई बीमारियाँ पनपने लगती हैं। स्वस्थ रहने के लिए तनावमुक्त रहें और ऐसी योजनाएँ बनाएं जो आपको तनाव से दूर रखें।

4-         छोटे-छोटे कदम लायें बड़े परिवर्तन

अच्छी सेहत की शुरूआत छोटे-छोटे कदमों से ही की जाती है। ऐसा जरूरी नहीं है कि कोई भी परिवर्तन एक ही क्षण या एक ही दिन में हमें सेहतमंद जिंदगी जीने के लिए कारगर बना दे। इस दिशा में उठाये गए कदम भी बहुत मददगार साबित हो सकते हैं। आप जॉगिंग, साइकलिंग, रनिंग, वॉकिंग या आसान वेट लॉस कार्यक्रमों से शुरुआत कर सकते हैं। ऐसे परिवर्तन एक समय बाद सेहत के लिए मददगार अवश्य साबित होंगे।

5-         पानी का अधिक मात्र में सेवन करें

पानी मनुष्य की मूलभूत आवश्यकता है। मानव शरीर सैकड़ों कार्य करता है और इन कार्यों को निष्पादित करने के लिए शरीर में पानी की नितांत आवश्यकता होती है। जहाँ तक मानव शरीर में पानी के महत्त्व का सवाल है उसका अनुमान केवल इसी बात से लगाया जा सकता है कि मनुष्य के शरीर में 64 % मात्र पानी की तथा 36%  मात्र अन्य पदार्थों की है। इसलिए मनुष्य के शरीर में पानी की महत्वता अन्य पदार्थों से कहीं अधिक है। स्वस्थ रहने के लिए वयस्कों को एक दिन में 6 से 8 गिलास पानी तथा बच्चों को 2 से 3 पानी पीना चाहिए।

6-         पूरी नींद लें

डॉक्टरों का मानना है कि आधुनिक समाज में नींद के महत्त्व की अनदेखी हो रही है, जिसके कारण शरीर के डीएनए पर होने वाला असर कई तरह की बीमारियों का कारण बन रहा है। नींद की कमी से हृदय रोग, डायबिटीज, संक्रमण और मोटापे जैसे रोग भी हो सकते हैं। इसलिए डॉक्टर सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से लोगों को पर्याप्त नींद लेने की सलाह देते हैं। बेहतर स्वास्थ्य की प्राप्ति के लिए वयस्क को 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए वहीं दूसरी ओर विद्यालय जाने वाले छात्रें को कम-से-कम 10 घंटे की नींद लेनी चाहिए। इसके अतिरिक्त व्यायाम भी अच्छी नींद के लिए बहुत जरूरी है।

7-         भूखे न रहें

आज की व्यस्त जिंदगी में लोगों के पास खाने तक का समय नहीं है जिसके कारण लोग लंबे समय तक भूखे रहते हैं और जैसे ही भोजन करने बैठते हैं तो उसका सेवन अधिक मात्रा में कर लेते हैं। जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित होता है। इसलिए समय निकालकार भोजन आराम से बैठकर और समय पर करें। ऐसा करने से शरीर सदैव स्वस्थ रहेगा।

8-         लिफ्ट का प्रयोग न करें

लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का प्रयोग करें क्योंकि सीढ़ियों का प्रयोग हार्ट एवं ब्लड सर्कुलेशन के लिए लाभकारी होता है। यदि आपको केवल एक या दो फ्लोर तक जाना है तो सीढ़ियों से ही जाएं। यह आसान कार्य भी व्यायाम के अंतर्गत आता है जो स्वस्थ रहने का सरल उपाय है। इसलिए जहाँ तक संभव हो लिफ्ट का प्रयोग न करें।

9-         धूप में समय बिताएं

वर्तमान समय में लोग खाली होने पर भी अपना अधिकतर समय टी-वी व मोबाइल फोन के साथ गंवाते हैं। सूरज की पर्याप्त रोशनी न मिलने से शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाती है, जिसके कारण हड्डियों से जुड़ी समस्याएँ जन्म ले लेती हैं। विटामिन की कमी से बचने के लिए दिन में कम से कम 10-15 मिनट धूप में बिताएं।

10-       पैदल चलें

यदि आपको घर के आस-पास से ही कुछ सामान खरीदना हो, तो गाड़ी से जाने की बजाय पैदल जायें। पैदल चलना भी एक प्रकार का व्यायाम है। पैदल चलने से हड्डियाँ मजबूत होती है, शरीर का संतुलन बना रहता है, पॉस्चर सुधरता है, हृदय रोग का खतरा कम होता है तथा तनाव से मुक्ति मिलती है।